भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ शनिवार को पहली बैठक की जिसमें चुनावी रणनीति और जमीनी स्तर पर जनसंपर्क को लेकर चर्चा की गई। इसी बैठक में वंदे मातरम् से जुड़े हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी पास किया गया। इस प्रस्ताव के जरिए बीजेपी ने कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा हाल ही में लिए गए उस फैसले की कड़ी आलोचना की है, जिसमें राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो पदों (स्टैंजा) के गायन को सीमित करने की बात कही गई थी।
बीजेपी का कहना है कि 1937 का राजनीतिक समझौता या कांग्रेस की कार्यसमिति का कोई भी प्रस्ताव देश के संवैधानिक संस्थानों और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता।
बीजेपी ने स्पष्ट किया कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मूल मंत्र और राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक है।
प्रस्ताव के अंत में कहा गया कि जिस ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष ने 1947 में भारत की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया था और जिससे ब्रिटिश साम्राज्य भयभीत रहता था, वही ‘वंदे मातरम्’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 के ‘विकसित भारत’ का महाघोष बनेगा। पार्टी ने दोहराया कि तुष्टीकरण या राजनीतिक सुविधा के लिए राष्ट्रगीत के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।